मैं जिन्दा हूँ – उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर में जिन्दा भूत

 मैं जिन्दा हूँ – उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर में जिन्दा भूत

थोड़ी गहरी नजर डालिए यह है मिर्जापुर के भोला नहीं नहीं यह थे मिर्जापुर के भोला जो अब नहीं रहे। आप सोच रहे होंगे कि एक जीते जागते आदमी को हम क्यों कह रहे हैं। तो ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि सरकारी कागज कह रहे हैं कि बुजुर्ग भोला है नहीं बल्कि थे जो 15 साल पहले गुजर गए तो फिर सामने यह कौन शख्स बैठा है जो खुद को भोला बता रहा है। यह तो सरकार ही जाने या फिर खुद भोला। लेकिन भोला तो गुजर गए तो जानेंगे कैसे ? सरकारी फाइलें झूठ नहीं बोलती, एक कागज में जो दर्ज हो गया तो हो गय। अगर किसी के नाम पर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी हो गया तो समझो वह मर गया। सरकारी कागज में मर जाने के बावजूद कोई घूमता मिले तो यह उसकी समस्या है कि उसे मौत के बाद भी शांति क्यों नहीं ह। यही हाल भोला का है मर जाने के बावजूद 15 साल से यहां वहां दफ्तरों के चक्कर काटते रहते हैं डीएम दफ्तर के बाहर पोस्टर लेकर बैठे रहते हैं छाती पीटते हैं कि वह जिंदा है। अब कोई इनकी माने या सरकारी कागज की मरे हुए इंसान की दलील क्या है ? यह भी सुनिए इनका कहना है कि यह सब जायदाद का खेल है इन्हें अपने भाइयों ने साबित कर दिया की भोला मर गए और लेखपाल दफ्तर में इनकी मौत के फर्जी कागज जमा करवा दिए और भोला के नाम की जमीन भाइयों के हड़प ली। आज या कल का नहीं बल्कि 15 साल पहले का है 15 सालों से भोला भूत बने गांव में घूम रहे है। परिवारिक के लोग इनकी परछाई से भी दूर भागते है तो अफसर अधिकारियों को यह दिखाई ही नहीं देते भूत जो ठहरे। उनके पूरे प्रकरण को जानेंगे कि क्या है उनकी समस्या वैसे हम लोगों ने जो अपने स्तर पर जांच कराई है। क्या कहना है डीएम साहब का – इनके जमीन के संबंध में पहले एक बात हुई थी लेकिन बाद में तहसीलदार न्यायालय में मुकदमा दाखिल किया गया था और उसमें निर्णय हुआ निर्णय होने तक के जमीन के संबंध में पहले एक मुलाकात हुई थी, लेकिन बाद में फिर तहसीलदार न्यायालय में मुकदमा दाखिल किया गया था और उसमें निर्णय हुआ निर्णय होने के उपरांत निर्णय न्यायालय में मामला विचाराधीन है और जांच कराने के पश्चात जो भी उचित कार्रवाई होगी या न्यायालय से जो भी उचित कार्रवाई होगी वह कार्रवाई हम लोग संपादित कराएंग। भला हो हिंदुस्तान की डिजिटल क्रांति का किसी ने इनका वीडियो बनाकर इंटरनेट पर डाल दिया तो सीएम दफ्तर से भूत की खोज खबर मंगवा ली गई। डीएम मिर्जापुर कृपया मामले का संज्ञान लेकर जांच करें और आवश्यक कार्यवाही करके जानकारी दें 15 सालों से जो भूत सबकी आंखों से ओझल था सीएम दफ्तर के तालाब से अफसरों को भी वह न सिर्फ साफ साफ नजर आने लगा बल्कि उसकी खोजबीन भी शुरू कर दी गई है उम्मीद है कि अब सरकारी कागजों का तिलक में भी जल्द टूटेगा की एक जीते जागते इंसान को भूत बनाने के जिम्मेदार कौन कौन से अफसर आते थे

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